मोटर और जनरेटर एक ही सिक्के के दो पहलू! क्या मोटर से बल्ब जल सकता है? माता-पिता और बच्चों के लिए मज़ेदार विज्ञान प्रयोग

नमस्ते, मैं हूँ केन कुवाको, आपका साइंस ट्रेनर। मेरे लिए हर दिन एक नया प्रयोग है।

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जब हम बिजली बनाने की बात करते हैं, तो क्या आपके मन में बड़े-बड़े बांधों या पावर प्लांट की तस्वीर आती है? लेकिन क्या आप जानते हैं कि हमारी हथेली में समा जाने वाले छोटे से खिलौने के अंदर भी वही तकनीक छिपी है जो एक बड़े बिजली घर के दिल में होती है। आज हम मिनी 4WD या छोटे खिलौनों में इस्तेमाल होने वाली मोटर की मदद से बिजली पैदा करने का एक जादुई प्रयोग करेंगे। जब आप अपनी आंखों के सामने एक छोटा सा बल्ब जलते हुए देखेंगे, तो आप विज्ञान के उस सच को महसूस कर पाएंगे जहाँ ऊर्जा अपना रूप बदलती है!

मोटर और जनरेटर: क्या ये जुड़वा भाई हैं?

हाल ही में मुझे नेशनल म्यूजियम ऑफ नेचर एंड साइंस में जनरेटर की प्रदर्शनी देखने का मौका मिला। वहां जनरेटर की बनावट को साफ देखा जा सकता था—जब हैंडल घुमाया जाता है, तो बीच में लगा चुंबक तेजी से घूमने लगता है। उसके चारों ओर तांबे के तार की कॉइल्स (coils) लिपटी होती हैं। चुंबक के हिलने से कॉइल के अंदर से गुजरने वाला चुंबकीय प्रवाह (Magnetic Flux) बदलता है और बिजली पैदा होती है।

इसे देखकर अगर आपके मन में यह ख्याल आया कि यह तो बिल्कुल मोटर जैसा ही है, तो आपकी सोच एकदम सही है!

असल में, मोटर में बिजली देने पर उसका घूमना और जनरेटर के धुरी (axis) को घुमाने पर बिजली पैदा होना, एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। इसका मतलब है कि घर में पड़ी छोटी सी मोटर भी एक शानदार जनरेटर बन सकती है। तो चलिए, धागा लपेटकर घुमाने की झंझट के बजाय, मैं आपको बताता हूँ बिजली पैदा करने का मेरा अपना आसान और पक्का तरीका—कुवाको स्टाइल मोटर जनरेटर!

बच्चों के साथ आजमाएं: मोटर से बिजली बनाने का प्रयोग

इस प्रयोग की सफलता का राज एक लकड़ी के टुकड़े और कपड़े वाली टेप (cloth tape) के बीच पैदा होने वाले घर्षण (friction) में है।

विज्ञान की रेसिपी: जरूरी चीजें

・मोटर (खिलौनों वाली छोटी मोटर) ・तार और छोटा बल्ब (या LED) ・लकड़ी का एक पतला टुकड़ा (लगभग 20 सेमी लंबा) ・कपड़े वाली टेप (Cloth tape)

प्रयोग करने का तरीका

१. मोटर के सिरों को तार की मदद से बल्ब से जोड़ दें। २. लकड़ी के टुकड़े के एक हिस्से पर कपड़े वाली टेप को अच्छी तरह लपेट दें। ३. मोटर की घूमने वाली धुरी (pin) पर उस टेप वाले हिस्से को धीरे से रखें और हल्का सा दबाएं। ४. अब लकड़ी को तेजी से अपनी ओर खींचें ताकि मोटर की धुरी पूरी रफ्तार से घूमने लगे!

नतीजा: अंधेरे में चमकती उम्मीद की रोशनी!

इतनी कम तैयारी के साथ क्या नतीजा निकलेगा? जरा इस वीडियो को देखिए!

जैसे ही लकड़ी को खींचा गया, मोटर से जुड़ा बल्ब झटके से जल उठा!

स्क्रीनशॉट

स्क्रीनशॉट

आपके हाथों की गतिज ऊर्जा (Kinetic Energy) मोटर के जरिए प्रकाश ऊर्जा (Light Energy) में बदल गई। ऊर्जा के इस बदलाव को महसूस करना वाकई रोमांचक है।

बिजली कैसे बनी? इलेक्ट्रोमैग्नेटिक इंडक्शन का जादू

बिना किसी सेल या बैटरी के यह बल्ब कैसे जला? इसका राज मोटर के अंदर मौजूद चुंबक और कॉइल में है।

१. मोटर के रूप में (बिजली → गति): जब हम बिजली देते हैं, तो कॉइल में चुंबकीय क्षेत्र बनता है और वह चुंबक के साथ प्रतिक्रिया करके धुरी को घुमाता है। २. जनरेटर के रूप में (गति → बिजली): इसके उलट, जब हम बाहर से ताकत लगाकर धुरी को घुमाते हैं, तो चुंबक के बीच कॉइल हिलती है। इससे कॉइल के भीतर चुंबकीय क्षेत्र बदलता है और बिजली बहने लगती है। इसे इलेक्ट्रोमैग्नेटिक इंडक्शन (Electromagnetic Induction) कहते हैं।

सच तो यह है कि दुनिया की ज्यादातर बिजली इसी तकनीक से बनती है। चाहे कोयले से चलने वाला प्लांट हो या पवन चक्की, हर जगह किसी न किसी ताकत से बस एक धुरी को घुमाया जाता है।

अगली बार जब कोई पुराना खिलौना खराब हो जाए, तो उसकी मोटर को खोलकर जरूर देखिएगा। उसके अंदर आपको वह छोटा सा चुंबक और तांबे का तार मिलेगा जो असल में एक बिजली घर है। जब हम विज्ञान की नजर से देखते हैं, तो हमारे आसपास की हर छोटी चीज एक बड़े प्रयोग का हिस्सा बन जाती है!

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