सिर्फ हिलाइए और जादू देखिए! कक्षा को जीवंत बनाने वाली रसायन की जादुई प्रतिक्रिया (सिग्नल एवं गेमिंग रिएक्शन)
नमस्ते! मैं हूँ कुवाको केन, आपका साइंस ट्रेनर। मेरे लिए हर दिन एक नया प्रयोग है।
【यह लेख रेडियो पर भी उपलब्ध है!】
क्या आप विश्वास करेंगे अगर मैं कहूँ कि मेरे पास एक ऐसा “जादुई पानी” है जिसे बस हिलाने से उसका रंग बदल जाता है? यह किसी जादूगर के जादुई काढ़े जैसा लगता है—जो पीले से लाल, फिर हरे रंग में बदलता है और थोड़ी देर शांत रखने पर वापस अपने असली रंग में आ जाता है। यह कोई चमत्कार नहीं, बल्कि रसायन विज्ञान (Chemistry) की शक्ति है।
आज मैं आपको दो ऐसे प्रयोगों के बारे में बताऊंगा जो देखने में बेहद शानदार हैं: “ट्रैफिक लाइट रिएक्शन” और “गेमिंग रिएक्शन”। हमारे साइंस क्लब के छात्रों ने इसे कई बार कोशिश करने के बाद तैयार किया है। रंगों का यह खेल किसी को भी विज्ञान का दीवाना बना सकता है। खास तौर पर “गेमिंग” नाम के पीछे की कहानी सुनकर तो स्कूल के छात्र और भी उत्साहित हो जाएंगे!
ट्रैफिक लाइट और गेमिंग रिएक्शन: केमिस्ट्री का जादुई प्रकाश
ये दोनों प्रयोग एक ऐसे रसायन पर आधारित हैं जो गिरगिट की तरह रंग बदलता है।
ट्रैफिक लाइट रिएक्शन जैसा कि नाम से पता चलता है, सड़क पर लगी लाइटों की तरह “पीला → लाल → हरा” रंग बदलता है। बस बोतल को हिलाएं और रंग बदलते देखें। जब आप इसे रख देते हैं, तो यह वापस पीले रंग में आ जाता है।
वहीं, गेमिंग रिएक्शन आज के ट्रेंड के हिसाब से तैयार किया गया है। इसमें भी रंग “पीला → लाल → नीला” के करीब बदलते हैं, लेकिन इसकी खासियत इसकी खूबसूरत “ग्रेडिएंट” (धीरे-धीरे रंगों का मिलना) है।
इसका नाम आज के “गेमिंग पीसी” या माउस से प्रेरित है, जो रंग-बिरंगी एलईडी लाइटों से चमकते हैं। जैसे एक गेमिंग माउस लाखों रंगों में चमकता है, वैसे ही यह घोल भी इंद्रधनुषी छटा बिखेरता है।
रंग क्यों बदलते हैं? ऑक्सीकरण और अपचयन का विज्ञान
इस जादू के पीछे का असली हीरो है “ऑक्सीकरण-अपचयन” (Oxidation-Reduction) की प्रक्रिया। घोल में मौजूद “इंडिगो कारमाइन” नाम का रंजक (dye) जब ऑक्सीजन के संपर्क में आता है या उससे अलग होता है, तो उसका आणविक ढांचा बदल जाता है, जिससे हमें अलग-अलग रंग दिखाई देते हैं।
ट्रैफिक लाइट रिएक्शन (Signal Reaction)
आइए समझते हैं यह कैसे काम करता है:
- जब तरल पीला होता है: इंडिगो कारमाइन “अपचयित” (Reduced) अवस्था में होता है, यानी इसमें ऑक्सीजन कम होती है।

- जब आप बोतल हिलाते हैं: हवा की ऑक्सीजन तरल में घुल जाती है और इंडिगो कारमाइन को ऑक्सीकृत (Oxidize) कर देती है।
हल्का हिलाने पर यह लाल हो जाता है, और ज़ोर से हिलाने पर यह हरा हो जाता है।

- जब आप इसे छोड़ देते हैं: घोल में मौजूद “ग्लूकोज” ऑक्सीजन को वापस सोख लेता है और इंडिगो कारमाइन को फिर से अपचयित कर देता है।
यह हरे से लाल और फिर वापस पीले रंग में लौट आता है। यह हिलाने (ऑक्सीकरण) और रखने (अपचयन) का खेल ही इन रंगों को जन्म देता है।
गेमिंग रिएक्शन (Gaming Reaction)
इसमें हम रसायनों को थोड़ा बदलते हैं और घोल को गर्म करते हैं, जिससे रंगों का बदलाव और भी कोमल और शानदार हो जाता है।





कैसे करें प्रयोग: अपना खुद का जादुई काढ़ा बनाएं!
यहाँ इस प्रयोग को करने की विधि दी गई है। हमने बड़े (3 लीटर) और छोटे (300 मिली) दोनों पैमानों के लिए रेसिपी तैयार की है।
[सावधानी] इसमें इस्तेमाल होने वाले सोडियम हाइड्रोक्साइड और सोडियम कार्बोनेट बहुत शक्तिशाली होते हैं। ये त्वचा और आंखों को नुकसान पहुंचा सकते हैं। हमेशा सुरक्षा चश्मा और दस्ताने पहनें और इन्हें सीधे हाथों से न छुएं।
ट्रैफिक लाइट रिएक्शन की विधि
A. बड़े पैमाने पर (3000ml) 1. 2400ml पानी में 60g सोडियम हाइड्रोक्साइड और 36g ग्लूकोज घोलकर “घोल A” बनाएं। 2. 300ml पानी में 1.5g इंडिगो कारमाइन घोलकर “घोल B” बनाएं। 3. दोनों को मिलाएं और पीले होने तक इंतज़ार करें।
B. छोटे पैमाने पर (300ml) 1. 200ml पानी में 5g सोडियम हाइड्रोक्साइड और 3g ग्लूकोज घोलकर “घोल A” बनाएं। 2. 25ml पानी में 0.125g इंडिगो कारमाइन घोलकर “घोल B” बनाएं। 3. दोनों को मिलाएं और पीला होने दें।
गेमिंग रिएक्शन की विधि
A. बड़े पैमाने पर (3000ml) 1. 2400ml पानी में 120g सोडियम कार्बोनेट और 36g ग्लूकोज घोलकर “घोल A” बनाएं। 2. 300ml पानी में 1.5g इंडिगो कारमाइन घोलकर “घोल B” बनाएं। 3. घोल A को 60°C तक गर्म करें। (यही गेमिंग रंगों का राज है!) 4. गर्म करने के बाद A और B को मिलाएं।
B. छोटे पैमाने पर (300ml) 1. 200ml पानी में 10g सोडियम कार्बोनेट और 3g ग्लूकोज घोलकर “घोल A” बनाएं। 2. 25ml पानी में 0.125g इंडिगो कारमाइन घोलकर “घोल B” बनाएं। 3. घोल A को 60°C तक गर्म करें और फिर B के साथ मिलाएं।
चलिए प्रयोग शुरू करते हैं!
तैयारी के बाद असली मज़ा शुरू होता है! बोतल को हिलाते ही छात्रों के चेहरे पर चमक आ जाएगी। “अरे वाह! यह तो सच में चमक रहा है!” जैसी आवाज़ें आपको हर तरफ से सुनाई देंगी।
इस प्रयोग की सबसे अच्छी बात यह है कि हम उस ऑक्सीजन को देख सकते हैं जिसे हम आम तौर पर नहीं देख पाते। विज्ञान की पढ़ाई जब एक जीवंत अनुभव बन जाती है, तो उसका मज़ा ही कुछ और होता है!
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