क्या बारबेक्यू में बचा कोयला बिजली बना सकता है? हैरान कर देने वाली ‘चारकोल बैटरी’ की चुनौती!

नमस्ते, मैं साइंस ट्रेनर केन कुवाको हूँ। मेरे लिए हर दिन एक नया प्रयोग है।

यह लेख रेडियो पर भी उपलब्ध है!

स्मार्टफोन, गेमिंग कंसोल और रिमोट जैसी चीजें आज हमारे जीवन का हिस्सा बन चुकी हैं। इन सभी के अंदर बैटरी जरूर होती है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि इसके अंदर असल में क्या होता है? बहुत कम लोगों ने इसे अंदर से देखा होगा।

क्या आपको यकीन होगा कि बारबेक्यू के बाद बचा हुआ कोयला और रसोई में इस्तेमाल होने वाली एल्युमीनियम फॉयल से बिजली पैदा की जा सकती है? आज हम चारकोल बैटरी (कोयले की बैटरी) बनाने जा रहे हैं। इसे बनाना बहुत आसान है, लेकिन जब पहली बार इससे म्यूजिक बजता है, तो वह “वाह!” वाला अहसास हर बार नया सा लगता है।

चारकोल बैटरी बनाकर समझें केमिस्ट्री का रोमांच!

इस प्रयोग की सबसे मजेदार बात यह है कि हम अपनी आँखों से देख सकते हैं कि साधारण चीजों के मेल से ऊर्जा कैसे पैदा होती है। विज्ञान का वह जादू, जिसे हम रेडॉक्स रिएक्शन (Oxidation-Reduction) कहते हैं और जो आमतौर पर दिखाई नहीं देता, उसे आप एक छोटे म्यूजिक बॉक्स की धुन के रूप में सुन पाएंगे।

१. सबसे पहले वीडियो देखकर समझें!

यह चारकोल बैटरी कैसे काम करती है, इसे समझने के लिए पहले यह वीडियो देखें:

२. तैयारी बहुत आसान है! जरूरी चीजों की लिस्ट

इस प्रयोग के लिए चाहिए ऐसी चीजें जो घर पर या पास की दुकान पर आसानी से मिल जाएं:

  • कोयला: (बारबेक्यू वाला कोयला चलेगा। अगर इसकी सतह खुरदरी हो, तो रिएक्शन और भी बेहतर होता है)
  • नमक का पानी: (पानी में खूब सारा नमक घोल लें। घोल जितना गाढ़ा होगा, बिजली उतनी ही अच्छी तरह बहेगी)
  • किचन पेपर या टिश्यू पेपर: (यह कोयले और एल्युमीनियम फॉयल को आपस में सीधे टकराने से रोकता है)
  • एल्युमीनियम फॉयल: (यह इलेक्ट्रोड का काम करेगी। थोड़ी मोटी फॉयल हो तो बेहतर है ताकि फटे नहीं)
  • क्लिप (Binder Clip): (कोयले से तार को मजबूती से जोड़ने के लिए)
  • इलेक्ट्रॉनिक म्यूजिक बॉक्स: (ऐसा चुनें जो कम वोल्टेज पर भी बज सके। यह ऑनलाइन आसानी से मिल जाता है)

३. प्रयोग का तरीका: बिजली का रास्ता तैयार करें

आइए, अब अपनी चारकोल बैटरी को असेंबल करते हैं:

  1. पेपर को नमक के पानी में भिगोएँ: किचन पेपर को नमक के घोल में अच्छी तरह डुबोएं और फिर हल्का सा निचोड़ लें। यह ‘इलेक्ट्रोलाइट’ का काम करेगा और बिजली ले जाने में मदद करेगा।
  2. कोयले पर पेपर लपेटें: गीले पेपर को कोयले के चारों ओर अच्छी तरह लपेट दें।
  3. एल्युमीनियम फॉयल लपेटें: पेपर के ऊपर से एल्युमीनियम फॉयल को बिना गैप छोड़े लपेटें। ध्यान रहे, एल्युमीनियम फॉयल सीधे कोयले को नहीं छूनी चाहिए, वरना शॉर्ट सर्किट हो जाएगा। बीच में पेपर की परत होना बहुत जरूरी है।
  4. कोयले पर क्लिप लगाएँ: कोयले के उस हिस्से पर जो बाहर दिख रहा है, एक क्लिप लगा दें। यह बैटरी का एक सिरा (इलेक्ट्रोड) बन जाएगा।
  5. म्यूजिक बॉक्स को कनेक्ट करें:
    • म्यूजिक बॉक्स के काले तार (नेगेटिव साइड) को एल्युमीनियम फॉयल से जोड़ें।
    • म्यूजिक बॉक्स के लाल तार (पॉजिटिव साइड) को कोयले वाली क्लिप से जोड़ें।

    अगर सब कुछ ठीक रहा, तो आपको धीमी लेकिन प्यारी सी धुन सुनाई देगी!

४. विज्ञान की बात: बिजली कैसे बनी?

इस बैटरी के अंदर इलेक्ट्रॉनों का एक अदृश्य खेल (रेडॉक्स रिएक्शन) चल रहा है:

  • नेगेटिव सिरा (-): एल्युमीनियम फॉयल एल्युमीनियम नमक के पानी में घुलने लगता है और इस दौरान इलेक्ट्रॉन छोड़ता है। रिएक्शन: Al → Al³⁺ + 3e⁻
  • पॉजिटिव सिरा (+): कोयला यहाँ कोयला खुद नहीं बदलता। कोयले की सतह पर मौजूद छोटे-छोटे छेदों में हवा की ऑक्सीजन जमा होती है। यह ऑक्सीजन एल्युमीनियम से आने वाले इलेक्ट्रॉनों को लेती है और हाइड्रोक्साइड आयन बनाती है। रिएक्शन: O₂ + 2H₂O + 4e⁻ → 4OH⁻

यही इलेक्ट्रॉनों का बहाव ‘इलेक्ट्रिक करंट’ बनकर म्यूजिक बॉक्स को चलाता है। कोयला न केवल बिजली का सुचालक है, बल्कि यह ऑक्सीजन को सोखकर रिएक्शन को तेज करने वाले उत्प्रेरक (Catalyst) की तरह भी काम करता है।

प्रयोग के बाद एल्युमीनियम फॉयल को जरूर देखें!

जब प्रयोग पूरा हो जाए, तो एल्युमीनियम फॉयल को खोलकर रोशनी के सामने देखें।

हैरानी की बात यह है कि आपको उसमें छोटे-छोटे छेद दिखाई देंगे। यह इस बात का सबूत है कि एल्युमीनियम ने बिजली बनाने के लिए खुद को ‘खर्च’ किया है। यह देखकर बच्चे अक्सर हैरान रह जाते हैं और उन्हें यकीन हो जाता है कि केमिकल रिएक्शन वास्तव में हुआ है!

साधारण चीजों से असाधारण अनुभव!

चारकोल बैटरी का प्रयोग किसी भी छात्र के लिए एक शानदार अनुभव है। इससे उन्हें “मैंने खुद बैटरी बनाई!” वाली खुशी और आत्मविश्वास मिलता है।

विज्ञान को सिर्फ किताबों तक सीमित न रखें। जब आप इसे अपने हाथों से करते हैं और एल्युमीनियम में छेद होते हुए देखते हैं, तो विज्ञान अचानक से दिलचस्प हो जाता है। घर या स्कूल में इस केमिकल ड्रामे का आनंद जरूर लें। और याद रखें, जब बड़े लोग भी “वाह!” कहकर उत्साह दिखाते हैं, तभी बच्चों के मन में कुछ नया सीखने की चिंगारी जलती है!

संपर्क और अन्य जानकारी

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