जापानी नूडल डिलीवरी का हैरतअंगेज राज: फिजिक्स के बिना यह मुमकिन नहीं! क्या आप जानना चाहेंगे कि आप अपने घर में किताबों का ऐसा ही “अजेय टावर” कैसे बना सकते हैं?

नमस्ते! मैं हूँ साइंस ट्रेनर केन कुवाको। मेरे लिए हर दिन एक नया प्रयोग है।

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दोस्तों, क्या आपने कभी फिल्मों या टीवी पर जापानी नूडल्स (सोबा) ले जाने वाले उन कारीगरों को देखा है, जो साइकिल पर नूडल्स के डिब्बों का पहाड़ लादकर ऐसे चलते हैं जैसे वह उनके शरीर का ही हिस्सा हो? यहाँ शोवा काल (पुरानी जापान) की एक तस्वीर है, जिसमें सोबा की डिलीवरी दिखाई गई है। यकीन मानिए, यह कोई एडिटिंग नहीं बल्कि एक असली फोटो है!

संदर्भ साइट यहाँ देखें: https://mag.japaaan.com/step/24051

वाह! यह तो किसी जादू जैसा है!

आखिर कोई इतनी ऊँचाई तक डिब्बे कैसे जमा सकता है?

क्या आपने भी कभी ऐसा सोचा है?

सच तो यह है कि यह हैरतअंगेज नजारा न तो कोई जादू है और न ही सिर्फ एक कला। इसके पीछे छिपे हैं भौतिक विज्ञान (Physics) के गहरे नियम और बेहतरीन तकनीक। आज हम विज्ञान की नजर से समझेंगे सोबा कारीगरों की उस पारंपरिक तकनीक को, जिससे उनका यह टावर कभी नहीं गिरता। चलिए जानते हैं भौतिकी के वे 3 राज!

सोबा टावर की भौतिकी: 3 सबसे महत्वपूर्ण बातें

1. स्थिरता का आधार: डिब्बों को फिसलने से बचाना

सोबा टावर को स्थिर रखने की पहली शर्त यह है कि डिब्बे अपनी जगह से हिलें नहीं। अगर एक भी डिब्बा थोड़ा सा भी खिसका, तो पूरे टावर का गुरुत्व केंद्र (Center of Gravity) बिगड़ जाएगा और पल भर में सब नीचे गिर जाएगा।

लेकिन सवाल यह है कि कोई चीज कितनी खिसकने पर गिरती है?

इसका राज छिपा है सपोर्ट बेस (Support Base) के सिद्धांत में। यह वह निचला हिस्सा होता है जिस पर कोई वस्तु टिकी होती है। जेंगा (Jenga) गेम के बारे में सोचिए। जब तक आप ब्लॉक को ठीक नीचे वाले ब्लॉक के ऊपर रखते हैं, वह स्थिर रहता है। लेकिन जैसे ही आप उसे थोड़ा बाहर की तरफ खिसकाते हैं, वह धड़ाम से गिर जाता है।

सोबा टावर के साथ भी यही होता है। जब तक ऊपरी डिब्बों का सामूहिक गुरुत्व केंद्र नीचे वाले डिब्बे के सपोर्ट बेस के अंदर रहता है, तब तक वह सैद्धांतिक रूप से नहीं गिरेगा।

प्रोफेशनल टिप्स:

चौड़े डिब्बों का उपयोग करना: इससे सपोर्ट बेस बढ़ जाता है और स्थिरता काफी बढ़ जाती है।

घर्षण (Friction) बढ़ाना: डिब्बों के बीच एंटी-स्लिप शीट जैसी चीजों का इस्तेमाल करने से वे फिसलते नहीं हैं।

2. संतुलन का रहस्य: गुरुत्व केंद्र को नीचे रखना

टावर का गुरुत्व केंद्र जितना ऊँचा होगा, हल्के से झटके से भी उसके गिरने का खतरा उतना ही ज्यादा होगा। इसके विपरीत, गुरुत्व केंद्र जितना नीचे होगा, स्थिरता उतनी ही अद्भुत होगी। यही कारण है कि खिलौना “रोली-पोली” गिरने के बाद फिर खड़ा हो जाता है या F1 कारें जमीन से चिपक कर चलती हैं।

जब गुरुत्व केंद्र नीचे होता है, तो साइकिल चलाते समय लगने वाले जड़त्व बल (Inertia) और सेंट्रीफ्यूगल बल (Centrifugal force) का असर कम हो जाता है। इससे टावर को मोड़ने वाली शक्ति (Moment of force) कम हो जाती है, जिससे उसे संभालना आसान हो जाता है।

इसीलिए, मिस्र के पिरामिडों की तरह नीचे से चौड़ा और भारी, और ऊपर जाते-जाते कम डिब्बे रखना यानी पिरामिड आकार सबसे समझदारी भरा तरीका है।

3. उस्तादों की कला: टावर को शरीर के करीब लाना

आखिरी तरीका है टावर को अपने शरीर से सटाकर रखना। जब इंसान, साइकिल और सोबा टावर, इन तीनों का मिला-जुला गुरुत्व केंद्र ठीक टायर के नीचे वाले हिस्से पर आता है, तब संतुलन सबसे सटीक होता है।

कारीगर टावर को अपने शरीर का हिस्सा मान लेते हैं और पूरे शरीर से संतुलन बनाते हैं। वैसे, पतले टायर वाली रोड बाइक की तुलना में मोटे टायर वाली माउंटेन बाइक ज्यादा स्थिर होती है क्योंकि उसका सपोर्ट बेस चौड़ा होता है।

साथ ही, आपने गौर किया होगा कि भारी सामान को शरीर से दूर रखने के बजाय करीब रखने पर वह हल्का महसूस होता है। यह उत्तोलक का सिद्धांत (Lever principle) है। शरीर और वजन के बीच की दूरी कम होने से उसे संभालने के लिए कम ताकत की जरूरत पड़ती है।

कारीगरों के हुनर में छिपे अन्य विज्ञान के नियम

इन तीन मुख्य बातों के अलावा भी, कारीगरों की सहज चाल में कई वैज्ञानिक नियम काम करते हैं:

जड़त्व का नियम (Inertia): अचानक ब्रेक मारने या तेजी से चलने पर सामान गिर सकता है। इसलिए वे बहुत ही धीरे और स्मूथ तरीके से गति को घटाते या बढ़ाते हैं।

सेंट्रीफ्यूगल बल (Centrifugal Force): मोड़ काटते समय टावर बाहर की तरफ झुकने की कोशिश करता है। इसे संतुलित करने के लिए वे बाइक सवार की तरह खुद को अंदर की तरफ झुका लेते हैं।

आवेग (Impulse): जैसे क्रिकेट में बॉल पकड़ते समय हाथ पीछे खींचे जाते हैं ताकि झटका कम लगे, वैसे ही ये कारीगर अपने घुटनों और हाथों को स्प्रिंग की तरह इस्तेमाल करके सड़क के झटकों को सोख लेते हैं।

ऊपर से देखने पर यह सिर्फ एक नूडल डिलीवरी लग सकती है, लेकिन असल में यह सालों के अनुभव से निखरा हुआ भौतिक विज्ञान का सबसे व्यावहारिक रूप है। क्या आपको भी अपने आसपास के कामों में विज्ञान की यह झलक दिखी? अगली बार जब आप कुछ देखें, तो जरूर सोचिएगा कि इसके पीछे की साइंस क्या है!

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