क्या पार्क की फिसलपट्टी एक विशाल जनरेटर है? माता-पिता और बच्चों के लिए फिसलपट्टी से सीखें स्थैतिक विद्युत का विज्ञान
नमस्ते! मैं हूँ कुवाको केन, आपका साइंस ट्रेनर। मेरे लिए हर दिन एक नया प्रयोग है।
जनवरी का महीना आ गया है और हवा में एक ऐसी खुश्की है जो शरीर को झकझोर देती है। इस मौसम में अक्सर ऐसा होता है कि जैसे ही आप दरवाजे की कुंडी को हाथ लगाते हैं, ‘चटाक!’ से एक झटका लगता है और आप हैरान रह जाते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि आपके पड़ोस के पार्क में मौजूद वह गोल प्लास्टिक वाला ‘फिसलन पट्टी’ (Slide) असल में विज्ञान की एक चलती-फिरती प्रयोगशाला है?
हाल ही में, मैं अपने बच्चे के साथ पार्क गया था। जितनी बार वह स्लाइड से नीचे आता, उसके शरीर में किसी जादूगर की तरह स्थिर विद्युत (Static Electricity) पैदा हो जाती। एक वैज्ञानिक के नजरिए से उसे देखना वाकई दिलचस्प था।
सिर्फ फिसलने से ‘बिजली’ पैदा? घर्षण बिजली का जादू
आखिर स्लाइड से फिसलने मात्र से शरीर में बिजली के झटके क्यों लगते हैं? इसका राज ‘घर्षण विद्युतीकरण’ (Triboelectric effect) नाम की प्रक्रिया में छिपा है।
जब स्लाइड का प्लास्टिक और बच्चे के कपड़ों का कपड़ा आपस में जोर से रगड़ते हैं, तो ‘इलेक्ट्रॉन’ एक वस्तु से दूसरी वस्तु में चले जाते हैं। इससे शरीर का कोई हिस्सा पॉजिटिव या नेगेटिव चार्ज से भर जाता है।

खासकर लंबे बालों वाले बच्चों के साथ आपने देखा होगा कि स्लाइड से उतरते ही उनके बाल हवा में खड़े हो जाते हैं। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि हर बाल में एक ही तरह का इलेक्ट्रिक चार्ज आ जाता है, और वे चुंबक के एक जैसे ध्रुवों की तरह एक-दूसरे को धकेलने (Repel) लगते हैं। बिजली की यह अदृश्य ताकत गुरुत्वाकर्षण को चुनौती देते हुए बालों को ऊपर उठा देती है—यह विज्ञान का एक अद्भुत चमत्कार है!
जब शरीर की बिजली ‘बाहर’ निकलती है
इससे भी मजेदार बात तब होती है जब बच्चा नीचे उतरता है और आप उसे छूते हैं। जैसे ही उंगली करीब आती है, ‘चटाक’ की आवाज के साथ झटका लगता है। बच्चे के शरीर में जमा बिजली मेरे शरीर के जरिए जमीन में चली जाती है। इसे ‘डिस्चार्ज’ (Discharge) कहते हैं।
जैसा कि आप वीडियो में देख सकते हैं, स्टेटिक बिजली सिर्फ एक घटना नहीं है, बल्कि ऊर्जा का स्थानांतरण है। सूखी हवा में बिजली आसानी से बाहर नहीं निकल पाती, इसलिए सर्दियों में यह नजारा साफ देखने को मिलता है।
स्लाइड खुद बन जाती है ‘बिजली की गुल्लक’
फिसलने के बाद, जब आप स्लाइड के पास से गुजरते हैं, तो आपको महसूस होगा कि आपके बाल कुछ ‘अजीब’ हरकत कर रहे हैं। यह इस बात का सबूत है कि स्लाइड खुद बहुत ज्यादा चार्ज हो चुकी है।
लोहा जैसी धातुएं बिजली की सुचालक (Conductor) होती हैं, लेकिन स्लाइड में इस्तेमाल होने वाला प्लास्टिक एक कुचालक (Insulator) है। कुचालक वस्तुओं में एक बार पैदा हुई बिजली वहीं ठहर जाती है, जिससे पूरी स्लाइड बिजली की एक बड़ी ‘गुल्लक’ की तरह काम करने लगती है।
सर्दियों का पार्क भौतिक विज्ञान (Physics) की किताबों में लिखी बातों को असल जिंदगी में महसूस करने की सबसे अच्छी जगह है। अगली बार जब आप पार्क जाएं, तो अपने बच्चों के साथ इस ‘स्लाइड वाले विज्ञान’ का आनंद जरूर लें!
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