सादा-सी काई की बड़ी कहानी! माइक्रोस्कोप में देखें ज़ेनिगोके के ‘नर-मादा’ और उछलते हुए बीजाणु

मैं हूँ कुवाको केन, आपका साइंस ट्रेनर। हर दिन एक नया प्रयोग है।

👀 क्या आप अनदेखा कर रहे हैं? आपके पैरों तले का सूक्ष्म जंगल: ज़ेनीकोके (मार्केन्शिया) की दुनिया

क्या आपने कभी सड़क के किनारे या स्कूल के कोने में फैली हरी-भरी “काई” (moss/liverwort) पर ध्यान दिया है, जहाँ से आप रोज़ाना गुज़रते हैं? दरअसल, यह काई (ब्रायोफाइट्स) किसी जीवित जीवाश्म से कम नहीं है! यह हमें उस प्राचीन इतिहास की कहानी बताती है, जब करोड़ों साल पहले पौधे पहली बार समुद्र से निकलकर ज़मीन पर आए थे।साइंस क्लास में जब हम पौधों के प्रजनन (Reproduction) के बारे में पढ़ते हैं, तो यह ब्रायोफाइट परिवार, खासकर ज़ेनीकोके (मार्केन्शिया), एक बेहद दिलचस्प विषय बन जाता है। इस बार, हमने स्कूल परिसर से ज़ेनीकोके को इकट्ठा किया और नर (Male) और मादा (Female) पौधों के बीच के अविश्वसनीय अंतरों को देखा। साथ ही, हमने इनकी अगली पीढ़ी को जन्म देने वाले ‘बीजाणुओं’ (Spores) का भी अवलोकन किया। माइक्रोस्कोप से दिखने वाली यह सूक्ष्म दुनिया छात्रों के लिए यकीनन आश्चर्य से भरी होगी!ज़ेनीकोके को इकट्ठा करें! इसे नम जगहें क्यों पसंद हैं?ज़ेनीकोके नम (Moist) जगहों पर फलते-फूलते हैं, और अक्सर स्कूल में पानी के पास या छाँव वाली ज़मीन पर पाए जाते हैं।इन्हें नम जगहें ही क्यों पसंद हैं?इसका कारण यह है कि ब्रायोफाइट्स में अभी तक “संवहनी ऊतक” (Vascular bundles – पानी ले जाने वाली नसें) पूरी तरह विकसित नहीं हुए हैं। इसलिए, ये अपने शरीर की सतह से सीधे पानी सोखते हैं।दूसरा कारण, जैसा कि हम आगे देखेंगे, निषेचन (Fertilization) के लिए इन्हें पानी की सख़्त ज़रूरत होती है।इस बार, हमने सावधानी से फावड़े का इस्तेमाल करके ज़ेनीकोके को इकट्ठा किया। इन्हें लेते समय, सुनिश्चित करें कि आप इन्हें इनकी जड़ जैसे हिस्से (मूलाभास/Rhizoids) के साथ लें। सूखने से बचाने के लिए इन्हें गीले कागज़ में लपेटकर रखें।आँखों के सामने अंतर! नर और मादा पौधों की बनावटइकट्ठा किए गए ज़ेनीकोके को ध्यान से देखें। इंसानों की तरह, ज़ेनीकोके में भी ‘नर’ (Male) और ‘मादा’ (Female) पौधे होते हैं। और उनकी बनावट में हैरान कर देने वाला अंतर होता है:

  • नर पौधा (Male Thallus): चपटी, पत्ती जैसी संरचना के सिरे पर एक तश्तरी जैसी या चपटी गांठ होती है, जिसके किनारे उठे हुए होते हैं। यह एक छोटे से हैम्बर्गर जैसा दिख सकता है। यहीं पर शुक्राणु (Sperm) बनते हैं।

  • मादा पौधा (Female Thallus): इसमें एक ताड़ के पेड़ जैसी या फटी हुई छतरी जैसी संरचना (उंगली जैसे कट) होती है। इसके निचले हिस्से में डिंब कोशिका (Egg cell) होती है, जहाँ अंततः बीजाणु बनते हैं।

है ना, आकार में कितना बड़ा अंतर! ज़ेनीकोके की ख़ासियत यह है कि इसके नर और मादा पौधों को आसानी से पहचाना जा सकता है।लेकिन इनकी ऐसी बनावट क्यों है?जब बारिश होती है, तो बारिश की बूंदें नर पौधे की चपटी तश्तरी पर तेज़ी से गिरती हैं। इस टक्कर से शुक्राणु छिटक कर बाहर निकलते हैं और पानी में तैरकर मादा पौधे तक पहुँचते हैं। माना जाता है कि वह चपटी तश्तरी बारिश की बूंदों का उपयोग करके शुक्राणु को दूर उछालने के लिए एक ‘लॉन्च पैड’ की तरह काम करती है।जब छात्र इस ‘प्रेम कहानी’ की कल्पना करते हुए इन दोनों की तुलना करते हैं, तो उनकी उत्सुकता (Engagement) देखने लायक होती है!अगली पीढ़ी के ‘बीजाणु’ और उन्हें उड़ाने वाला ‘स्प्रिंग’: इलाटेर्स (Elaters)मादा पौधे की छतरी के नीचे, जो पीला, रोएँदार हिस्सा होता है, उसी में बीजाणु भरे होते हैं। हमने इस हिस्से को चिमटी से हल्के से थपथपाकर बीजाणुओं को निकाला और माइक्रोस्कोप में देखा। इस छोटे से हिस्से में पौधों की गज़ब की इंजीनियरिंग छिपी है।अवलोकन विधिज़रूरी सामग्री

  • ज़ेनीकोके (परिपक्व मादा पौधा)
  • चिमटी (Tweezers)
  • स्लाइड ग्लास, कवर ग्लास
  • माइक्रोस्कोप (400x आवर्धन/Magnification अनुशंसित)

प्रक्रिया

  1. बीजाणुओं को निकालें
    • मादा पौधे के बीजाणुओं वाले पीले, रूई जैसे हिस्से को चिमटी से पकड़ें और स्लाइड ग्लास पर हल्के से थपथपाएँ या खोलें।

    • बीजाणुओं को स्लाइड ग्लास पर गिरने दें।
  1. एक स्लाइड तैयार करें (Prepare the Slide)
    • बीजाणुओं पर पानी की एक बूंद डालें और कवर ग्लास को धीरे से रखें।
  2. माइक्रोस्कोप में देखें
    • पहले कम आवर्धन पर फोकस करें, फिर 10x आँख लेंस $\times$ 40x ऑब्जेक्टिव लेंस (400x) पर बारीक विवरण देखें।

हमने 10x आँख लेंस $\times$ 40x ऑब्जेक्टिव लेंस, यानी 400x आवर्धन पर अवलोकन किया।अवलोकन परिणाम: बीजाणुओं के साथ दिखने वाले ‘धागे’ का रहस्यजब आप माइक्रोस्कोप में देखते हैं, तो आपको अनगिनत छोटे गोल कण दिखाई देंगे। यही हैं बीजाणु (Spores)।और बीजाणुओं के बीच, यदि आप और अच्छे आवर्धन पर देखें, तो आपको थोड़ा लंबा, मुड़ा हुआ धागे जैसा कुछ दिख सकता है। इसे इलाटेर्स (Elaters) नामक ऊतक कहा जाता है।दरअसल, यह एक ‘स्प्रिंग’ की तरह काम करता है जो आर्द्रता (Humidity) बदलने पर सिकुड़ता और फैलता है। जब वातावरण सूखता है, तो यह स्प्रिंग तेज़ी से उछलता है, और इस झटके से बीजाणुओं को दूर तक फैला देता है। यह हिल-डुल न सकने वाले पौधों द्वारा अपने क्षेत्र का विस्तार करने के लिए विकसित किया गया एक शानदार भौतिक तंत्र (Physical Mechanism) है!अपने पैरों तले के छोटे से ‘महान प्रकृति’ को महसूस करेंज़ेनीकोके के अवलोकन के माध्यम से, हम पौधों में प्रजनन विधियों की विविधता और पर्यावरण के अनुकूल होने के लिए उनके चतुर तंत्रों के बारे में जान सकते हैं।अक्सर, काई को “अजीब” या “गंदा” माना जाता है, लेकिन जब छात्र माइक्रोस्कोप में इसकी जटिल संरचना देखते हैं, तो उनकी आँखें चमक उठती हैं। खुद से नमूना इकट्ठा करने और उसे बड़ा करके देखने का यह अनुभव, पाठ्यपुस्तक के ज्ञान को ‘जीवित ज्ञान’ में बदल देगा।संपर्क और अनुरोधसाइंस के चमत्कारों और मज़े को और करीब से जानें! यहाँ घर पर किए जा सकने वाले मजेदार साइंस एक्सपेरिमेंट्स और उनके आसान तरीक़ों का संग्रह है। कृपया और खोजें!संचालक (Operator) कुवाको केन के बारे में यहाँ जानेंविभिन्न अनुरोधों (लेखन, भाषण, एक्सपेरिमेंट क्लास, टीवी सुपरविज़न, एक्टिंग आदि) के लिए यहाँ क्लिक करेंलेख अपडेट X पर (ट्विटर) प्रकाशित किए जाते हैं!

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