हमने ज्वालामुखी बनाया—और यह धमाकेदार मज़ेदार निकला! प्लास्टर और बेकिंग सोडा से प्रयोग की पूरी रेसिपी!

नमस्ते, मैं साइंस ट्रेनर कुवाको केन हूँ। हर दिन एक नया प्रयोग!

विज्ञान की कक्षा में सबसे ज़्यादा मज़ा तभी आता है जब हम खुद करके देखते हैं, है ना? बच्चों की आँखों की चमक और “समझ आ गया!” वाली आवाज़ सुनकर हम शिक्षकों का मन भी खिल उठता है। मैं प्रशिक्षु शिक्षिका H के साथ “ज्वालामुखी” का पाठ पढ़ा रहा था, और उसी दौरान किया गया विस्फोट का प्रयोग सचमुच जिज्ञासा जगा देने वाला पल बन गया।

“मैग्मा कितना चिपचिपा है, इसका ज्वालामुखी के आकार से क्या संबंध है?”

पाठ्यपुस्तक में लिखी बातें रट लेना ही काफ़ी नहीं है। विज्ञान का असली मज़ा तो तब है जब हम उसे देखें, छुएँ और महसूस करें। इसलिए हमने तय किया कि घर-आँगन की आसान चीज़ों से ज्वालामुखी विस्फोट का अपना मॉडल बनाएँगे! यह प्रयोग देखने में जितना आसान लगता है, असल में उतना ही गहरा है।

इसमें सिर्फ़ चार चीज़ें लगती हैं: जिप्सम, बेकिंग सोडा, कपड़े धोने वाला गोंद और पानी। इन चारों के अनुपात में ज़रा-सा बदलाव करते ही मैग्मा की चाल और उसका चिपचिपापन बिलकुल बदल जाता है। ऐसा लगता है मानो हम असली ज्वालामुखी की गतिविधि का सिमुलेशन कर रहे हों।

सबसे दिलचस्प बात वह रासायनिक अभिक्रिया है जो जिप्सम (कैल्शियम सल्फ़ेट: CaSO₄), बेकिंग सोडा (सोडियम बाइकार्बोनेट: NaHCO₃) और पानी को मिलाने पर होती है। इसमें कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) गैस बनती है!

इस गैस की वजह से मिश्रण धीरे-धीरे फूलता जाता है, बिलकुल वैसे ही जैसे असली ज्वालामुखी फटने से पहले धीरे-धीरे फूलता है।

हमने अनुपात बदल-बदलकर यह प्रयोग कई बार दोहराया, तब कहीं जाकर “अरे वाह, यह तो काम कर रहा है!” वाली बढ़िया विधि मिली। इसमें काफ़ी समय लगा, लेकिन मुझे एक बार फिर महसूस हुआ कि विज्ञान की खोज ऐसी ही होती है। फिर अगले साल की प्रशिक्षु शिक्षिकाओं T और S ने इसे और बेहतर बनाया। आज मैं आपको बताऊँगा कि हमने ढेर सारी कोशिशों के बाद ज्वालामुखी विस्फोट का प्रयोग सफल बनाने के लिए सामग्री का कौन-सा अनुपात खोजा और नतीजे कैसे दिखे!

ज़रूरी सामान

・प्लास्टिक का डिब्बा ・जिप्सम १०g×२ ← ज़िप वाली थैली में रखें ・बेकिंग सोडा ५g×२ ← वाष्पन प्याली में रखें ・कपड़े धोने वाला गोंद (PVA) ・पानी ・दवा वाला छोटा चम्मच ・काँच की छड़ ・ट्रे ・प्लास्टिक कार्डबोर्ड

प्लास्टिक के डिब्बे के लिए हमने Daiso का यह डिब्बा इस्तेमाल किया। आकार भी मायने रखता है, इसलिए अगर आप यही तरीका अपना रहे हैं तो यही डिब्बा लें।

Daiso 70ml  ४ का पैक  गोल मिनी पैक

इस प्लास्टिक के डिब्बे के तले में और प्लास्टिक कार्डबोर्ड में सोल्डरिंग आयरन से छेद कर लें, और पहले से उन पर कपड़े वाला टेप चिपका दें।

इन्हें बैट (ट्रे) में रखना ठीक रहेगा।

छेद का आकार बहुत अहम है। लगभग इतना होना चाहिए।

अब सबसे ज़रूरी चीज़, यानी अनुपात:

कम चिपचिपा मैग्मा: PVA गोंद १ml + पानी ३०ml
ज़्यादा चिपचिपा मैग्मा: PVA गोंद १०ml + पानी १५ml

इन्हें पहले से ऊपर बताए गए डिब्बों में अलग-अलग भरकर रख लें।

【प्रयोग की विधि】

①  PVA गोंद और पानी वाले प्लास्टिक के डिब्बे को काँच की छड़ से अच्छी तरह मिलाएँ।

②  PVA गोंद और पानी वाले डिब्बे में जिप्सम १०g (ज़िप वाली थैली वाला) डालें।

③  डिब्बे में जिप्सम, PVA गोंद और पानी एकदम अच्छी तरह घुल-मिल जाएँ, इसके लिए काँच की छड़ से मिलाएँ।

④  जब अच्छी तरह मिल जाए, तो उसमें बेकिंग सोडा ५g डालें और पूरे मिश्रण को फुर्ती से काँच की छड़ से मिलाएँ।

※ ③ और ④ का क्रम गड़बड़ न करें। ④ में बेकिंग सोडा डालते ही रासायनिक अभिक्रिया शुरू होती है और कार्बन डाइऑक्साइड बनने लगती है। साथ ही, ③ वाली अवस्था में २० मिनट जैसा लंबा समय छोड़ देने पर जिप्सम पानी से अभिक्रिया करके जम जाता है और प्रयोग बिगड़ जाता है। खोजने पर पता चला कि जिप्सम और पानी की अभिक्रिया से लगभग ५ मिनट में चिपचिपापन आ जाता है और वह जमने लगता है।

※ ④ में पूरे मिश्रण को फुर्ती से मिलाकर तुरंत ढक्कन बंद करना भी बहुत ज़रूरी है। साथ ही, बेकिंग सोडा कभी-कभी गट्ठे बनकर जम जाता है, इसलिए उसे दवा वाले चम्मच से पहले ही बारीक कर लें।

⑤ प्लास्टिक के डिब्बे का ढक्कन बंद करें, उसे ट्रे पर उलटा रख दें, और चिपके हुए टेप को तुरंत खींचकर हटा दें।

⑥ ऊपर से छेद वाला प्लास्टिक कार्डबोर्ड ढक दें, और लावा मॉडल को सीधे ऊपर से देखते हुए घोल (लावा) के फैलाव को ध्यान से देखें।

※ प्रयोग करने वाला पॉलीथीन के दस्ताने ज़रूर पहने! साथ ही सब लोग लैब कोट और सुरक्षा चश्मा पहनें!

असल में नतीजा कुछ ऐसा दिखा:

कम चिपचिपा होने पर

ज़्यादा चिपचिपा होने पर

ऊपर से देखने पर, कम चिपचिपा होने की स्थिति

ऊपर से देखने पर, ज़्यादा चिपचिपा होने की स्थिति

अगर प्लास्टिक कार्डबोर्ड न हो, तो नतीजा नीचे जैसा दिखता है। इससे आप खुद समझ जाएँगे कि कार्डबोर्ड हो तो कितना बेहतर रहता है।

सार यह कि बाईं तरफ़ कम चिपचिपा और दाईं तरफ़ ज़्यादा चिपचिपा प्रकार है।

ऊपर से देखने पर दोनों की तुलना:

・कम चिपचिपे मैग्मा वाले विस्फोट का वीडियो (किलाउआ पर्वत, लावा)

・किलाउआ विस्फोट

・मध्यम चिपचिपेपन वाले विस्फोट का नज़ारा (साकुराजिमा विस्फोट)

रंग के फ़र्क़ के बारे में

मौना लोआ और किलाउआ में मिलने वाला बेसाल्ट, और शोवा-शिनज़न में मिलने वाला रायोलाइट (रंग के फ़र्क़ पर ध्यान दें)

बेसाल्ट कालिमा लिए हुए है, जबकि रायोलाइट सफ़ेदी लिए हुए है।

नीचे की रोक (पार्टीशन) न होने पर क्या दिखता है

ज़्यादा चिपचिपा होने पर

ऊपर से देखने पर,

कम चिपचिपा होने पर

H जी की एक तरकीब से हमने काली ट्रे पर दोनों प्रकार एक साथ करके देखे।

ऊपर बाईं तरफ़ कम चिपचिपा प्रकार है और दाईं तरफ़ ज़्यादा चिपचिपा प्रकार। चार-चार लोगों की टोली को एक-एक सेट दिया गया था, इसलिए खूब रौनक रही!

【इस अनुपात से विस्फोट क्यों होता है?】

इस प्रयोग की असली कुंजी जिप्सम, बेकिंग सोडा और पानी की रासायनिक अभिक्रिया है।

बेकिंग सोडा के टूटने से कार्बन डाइऑक्साइड बनना: बेकिंग सोडा (सोडियम बाइकार्बोनेट: NaHCO₃) पानी में घुलने पर आंशिक रूप से टूटकर कार्बोनेट आयन (CO₃²⁻) और बाइकार्बोनेट आयन (HCO₃⁻) बनाता है, और फिर कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) और पानी पैदा करता है।

जिप्सम और बेकिंग सोडा की अभिक्रिया से कार्बन डाइऑक्साइड बनना:

जिप्सम (कैल्शियम सल्फ़ेट: CaSO₄) पानी में घुलकर कैल्शियम आयन (Ca²⁺) देता है, और बेकिंग सोडा से बाइकार्बोनेट आयन (HCO₃⁻) बनते हैं। इन दोनों की अभिक्रिया से कैल्शियम कार्बोनेट (CaCO₃) अवक्षेपित होता है, और साथ ही कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) और पानी भी बनते हैं।

कपड़े धोने वाले गोंद (PVA) की भूमिका: गोंद में मौजूद पॉलीविनाइल अल्कोहल (PVA) पानी में घुलने पर अपने लंबे अणुओं के आपस में उलझ जाने से बहुत गाढ़ापन (श्यानता) दिखाता है। यही PVA कार्बन डाइऑक्साइड के बुलबुलों को अपने अंदर कैद कर लेता है, जिससे बुलबुले एक झटके में बाहर नहीं निकलते, बल्कि धीरे-धीरे फूलते हुए बाहर आते हैं। इस तरह हमें “चिपचिपा विस्फोट” देखने को मिलता है।

PVA कम हो तो बुलबुले जल्दी निकल जाते हैं और विस्फोट पतला-बहने वाला होता है (हवाई जैसे ढाल वाले ज्वालामुखी की तरह)। PVA ज़्यादा हो तो चिपचिपापन बढ़ जाता है और गुंबद जैसा उभार बनता है (शोवा-शिनज़न जैसे लावा गुंबद की तरह)।

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